अम्ल, क्षारक  और लवण

अम्ल  के गुणधर्म:-

  • स्वाद में खट्टे होते हैं  |
  • नीले लिटमस को लाल में बदल देते हैं |
  • जल में H+ या H3O+ आयन उत्पन्न करते हैं
  • H+ आयन की सांद्रता बहुत अधिक होती है |
  • OH-  आयन की सांद्रता बहुत कम होती है |
  • pH का मान 7 से कम होता है

 क्षारक के गुणधर्म:-

  • स्वाद में कड़वे  होते हैं   
  • लाल लिटमस को नीले में बदल देते हैं
  • जल में OH- आयन उत्पन्न करते हैं
  • H+ आयन की सांद्रता बहुत कम होती है |
  • OH-  आयन की सांद्रता बहुत अधिक होती है |
  • pH का मान 7 से अधिक होता है

महत्वपूर्ण बिंदु

  • प्रबल अम्ल– :    जल के विलयन में जल्दी व अधिक आयनीकृत हो  जाते हैं |
  •                         e.g. – HCl   , HNO3  , H2SO4 आदि
  •  दुर्बल अम्ल-:     जल के विलयन में कम व धीरे -धीरे आयनीकृत होते   हैं |

                          e.g. –   CH3COOH , लैक्टिक अम्ल  , ऑक्सेलिक अम्ल आदि

  •  तनु अम्ल -:       जिसमें अम्ल कम और जल अधिक मात्रा में हो |
  • सांद्र  अम्ल-:       जिसमें अम्ल अधिक और जल कम मात्रा में हो |
  • प्रबल क्षारक– :    जल के विलयन में जल्दी व् अधिक आयनीकृत हो  जाते हैं    e.g. – KOH , NaOH आदि
  •  दुर्बल क्षारक-:    जल के विलयन में कम व धीरे -धीरे आयनीकृत होते हैं |        e.g. NH4OH आदि
  • तनु  क्षारक -:     जिसमें क्षारक कम और जल अधिक मात्रा में हो
  • सांद्र क्षारक-:      जिसमें जल कम और क्षारक अधिक मात्रा में हो
  • क्षार          -: जो क्षारक पानी में घुलनशील होताहै  वो क्षार कहलाता है  |

सूचक :-

  1. प्राकृतिक सूचक  :-   ये पौधों से   प्राप्त होते हैं |उदाहरण :- लिटमस   यह लाइकेन पौधे से मिलता है |             
  2.   गंधीय सूचक:-     यह रासायनिक पदार्थ होता है ।   उदाहरण फेनॉफ्थलीन ,  मिथाइल ऑरेंज                                 
  3. कृत्रिम सूचक :- ऐसे पदार्थ जिनकी गंध अम्लीय या क्षारकीय माध्यम में बदल जाती  है  | उदाहरण:- प्याज का रस |

  • लिटमस पेपर नीले और लाल रंग का होता है ।  अम्ल नीले लिटमस पेपर को लाल कर देता है  |                          
  • क्षारक लाल लिटमस पेपर को नीला कर देता है ।

दिया गया विलयन अम्ल है , क्षारक है या उदासीन है , इसकी पहचान बताने वाले को सूचक कहते हैं । सूचक तीन प्रकार के होते हैं :-

कृत्रिम सूचकों की अम्ल और क्षारक के साथ अभिक्रिया

                सूचकअम्ल के साथ परिवर्तनक्षारक के साथ  परिवर्तन
               लिटमस                   लाल                    नीला
                हल्दी            कोई बदलाव नहीं                    लाल
             फेनॉफ्थलीन                   रंगहीन                   गुलाबी
             मिथाइल ऑरेंज                     लाल                   पीला
             प्याज का रस                 तीखी गंध              कोई गंध नहीं

 अम्ल और क्षारक के रासायनिक गुण  :-

                Na  +   HCl     ———-> NaCl    +             H2

             धातु       अम्ल   ———->    लवण         हाइड्रोजन गैस

                   Zn  +         NaOH    ———-> Na2ZnO2      +      H2

                  धातु            क्षारक                             लवण              हाइड्रोजन गैस

हाइड्रोजन गैस की जाँच कैसे करेंगे :-

 जलती हुयी मोमबत्ती को परखनली के मुँह के पास लेके जाने  से  अगर  फट-फट की आवाज  उत्पन्न हो तो परखनली से निकलने वाली गैस हाइड्रोजन गैस होगी |

  • अम्ल  + धातु कार्बोनेट   ———> लवण  + कार्बन डाइऑक्साइड  + जल

HCl     +   Na2CO3 ———>   NaCl   +          CO2  +  H2O 

  • अम्ल + हाइड्रोजन कार्बोनेट             लवण +कार्बन डाइऑक्साइड +  जल

  HCl   +   NaHCO3    ——–>   NaCl   +   CO2   +  H2O

चुना पत्थर , खड़िया  ,  संगमरमर  =             कैल्शियम कार्बोनेट (CaCO3) 

 

HCl   +   NaHCO3    ———->   NaCl   +     CO2    +  H2O

CO2 की जाँच:-

        Ca(OH)2  + CO2      ———> CaCO3       +            H2O

                                                          सफ़ेद अवक्षेप

अत्यधिक मात्रा में CO2 प्रवाहित करने पर :-

 CaCO3 + H2O + CO2  ————>    Ca(HCO3)2

                                                              जल में घुलनशील

  • क्षारक +  धातु कार्बोनेट   ———>   कोई अभिक्रिया नहीं होगी 
  •  क्षारक  + हाइड्रोजन कार्बोनेट    ———->   कोई अभिक्रिया नहीं होगी                                       

 उदासीनीकरण  अभिक्रिया :-

अम्ल और क्षारक आपस में अभिक्रिया करके    लवण और जल का  निर्माण करते हैं ऐसे उदासीनीकरण  अभिक्रिया कहते हैं  |

अम्ल   + क्षारक   ———->    लवण   +    जल

 HCl   +    NaOH    ———>    NaCl   +     H2O   

धातु ऑक्साइड  की प्रकृति क्षारकीय  होती है |

  • अम्ल  +  धातु ऑक्साइड                                लवण   +    जल

HCl     +       MgO   ———–>   MgCl2   +    H2O

  HCl    +     CuO      ————>     CuCl2  +     H2O

  • क्षारक   +  अधातु ऑक्साइड    ————–>   लवण    +   हाइड्रोजन गैस

NaOH   +        CO2     ————->   Na2CO3  +      H2

अधातु ऑक्साइड  की प्रकृति अम्लीय होती है  |

जलीय विलयन में अम्ल और क्षारक :-

  • सभी अम्ल जल के विलयन में  H+ आयन उत्पन्न  करते हैं  |

                HCl  +   H2O     ————–>   H+      +      Cl

                 H+      +   H2O  ————>   H3O+

  • सभी क्षारक जल के  विलयन में OH आयन उत्पन्न करते हैं |

           NaOH    +      H2O     ———-> Na+        +          OH                      

अम्ल और क्षारक  के विलयन कितने प्रबल होते हैं :-                      

किसी विलयन में उपस्थित हाइड्रोजन की सांद्रता ज्ञात करने के लिए एक स्केल विकसित किया गया है जिससे pH स्केल कहते हैं |

pH  का अर्थ है – potenz of hydrogen (हाइड्रोजन की शक्ति ) | पुसान्स  (POTENZ)  एक जर्मन शब्द है |

  • साधारण भाषा में pH एक ऐसी संख्या है जो किसी विलयन की अम्लीयता या क्षारकियता दर्शाती है |
  • इस  pH स्केल से सामान्यतः 0 से 14 तक pH ज्ञात कर सकते हैं |
  • अम्ल या क्षारक की शक्ति ( प्रबलता ) विलयन में क्रमशः H+ और OH- आयन की सांद्रता पर निर्भर करती है |  

pH = 7   ———    उदासीन

pH  >  7  ———-   क्षारकिय

  pH <   7  ———– अम्लीय

 विलयन में अम्ल अथवा क्षारक कितना प्रबल है इसको जानने के लिए  सार्वत्रिक  सूचक का उपयोग किया जाता है जो अनेक सूचकों का मिश्रण होता है।

  • सार्वत्रिक सूचक किसी विलयन में हाइड्रोजन आयन की  विभिन्न  सांद्रता को विभिन्न रंगो में प्रदर्शित करता है ।

क्या पौधे और पशु pH के प्रति सवेंदनशील होते हैं :-

  • हमारा शरीर 7.0 से 7.8 परास (Range) के बीच ही कार्य करता है |
  • वर्षा के जल का pH मान जब 5.6 से कम हो जाता है तब यह अम्लीय वर्षा कहलाती है |

हमारे पाचन तंत्र का pH:- 

                                             हमारा उदर हाइड्रोकलोरिक अम्ल उत्पन्न करता है जो भोजन को पचाने में सहायक होता है |अपच की स्स्थिति में उदर  अधिक मात्रा में अम्ल उत्पन्न करता है जिसके कारण पेट में दर्द और    जलन का अनुभव होता है | इस दर्द से मुक्त होने के लिए ऐन्टैसिड का उपयोग किया जाता है | इनकी प्रकृति दुर्बल क्षारकीय होती है   जो उदर में अम्ल की मात्रा को उदासीन कर देता है| e.g.  मैग्नीशियम हाइड्रो ऑक्साइड ( मिल्क ऑफ़ मैग्नीशिया )

मिटटी की pH :- 

अच्छी उपज के लिए पौधों को एक विशेष pH परास की आवश्यकता होती है | यदि किसी स्थान की मिटटी का pH कम या ज्यादा हो तो किसान उसमें आवश्यकता अनुसार अम्लीय या क्षारकीय पदार्थ मिलाते  हैं |

pH परिवर्तन के कारण दन्त क्षय :-

  • दांतों का  इनेमल (दत्तवलक )  कैल्सियम फॉस्फेट से बना होता है जो की शरीर का सबसे कठोर पदार्थ है यह जल में नहीं घुलता लेकिन मुँह का pH 5.5 से कम होने पर यह संक्षारित हो जाता है मुँह में उपस्थित बैक्टीरिया , मुँह में अवशिष्ट  शर्करा और खाद्य पदार्थों का निम्नीकरण करके अम्ल उत्पन्न  करते हैं | यानि हम यह कह सकते हैं की अगर मुँह का pH मान 5.5 से कम हो जाता  है तो दांतों का क्षय होता रहता  है |
  • क्षारकीय दन्त मंजन का उपयोग करने से आधिक्य अम्ल की मात्रा को उदासीन कर देते हैं ।

पशुओं और पौधों द्वारा उत्पन्न रसायनों से आत्मरक्षा :-

  • मधुमखी का डंक मेथेनोइक अम्ल छोड़ता है जिसके कारण दर्द और जलन का अनुभव होता है डंक मारे गए अंग में  बेकिंग सोडा का उपयोग करने से  राहत मिलती है ।
  • नेटल (पौधा ) के डंक वाले बाल भी मेथेनोइक अम्ल छोड़ते हैं इसके कारण भी दर्द और जलन का अनुभव होता है ।  इसका इलाज डॉक पौधे के पत्तों को डंक वाले अंग पर रगड़कर किया जाता है ।

                              कुछ प्राकृतिक अम्ल

लवणों का pH

प्रबल अम्ल + प्रबल क्षार ————->   लवण    (उदासीन ,pH = 7)

प्रबल अम्ल  +  दुर्बल क्षार  ————->  लवण  (अम्लीय लवण ,pH < 7)

प्रबल क्षार + दुर्बल अम्ल     ———–> लवण (क्षारकीय ,pH > 7)

 

क्रिस्टलन का जल :-

लवण के एक सूत्र इकाई में जल के निश्चित अणुयों की संख्या

CaSO4.2H20  में   क्रिस्टलन के जल के 2 अणु है  |    

CuSO4.5H2O  में   क्रिस्टलन के जल के 5 अणु है |

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