प्रिज्म से प्रकाश का अपवर्तन :-

प्रिज्म :-      प्रिज्म के दो त्रिभुजाकार आधार व तीन आयताकार पार्श्व पृष्ठ होते हैं |

प्रिज्म कोण  :- प्रिज्म के दो फलकों के बीच के कोण को प्रिज्म कोण कहते हैं |

विचलन कोण :- आपतित किरण व निर्गत किरण के बीच के कोण को विचलन कोण कहते हैं |

कांच के प्रिज्म द्वारा श्वेत प्रकाश का अपवर्तन :-

सूर्य का श्वेत प्रकाश जब प्रिज्म से होकर गुजरता है तो यह सात रंगों (वर्णों) में  विभाजित हो जाता है , इस प्रक्रिया को विक्षेपण कहते हैं  |

इंदरधनुष कैसे बनता है ?   वर्षा के पश्चात् आकाश में जल की छोटी छोटी बूँदें  प्रिज्मों की भांति कार्य करती हैं | सूर्य के आपतित प्रकाश को ये बूँदें अपवर्तित तथा विक्षेपित करती हैं , इसके बाद इन्हे आंतरिक प्रवर्तित करती हैं , अंततः जल की बूँद से बाहर निकलते समय प्रकाश को पुनः अपवर्तित करती हैं और हमें सात रंगों की पट्टी दिखती देती है जिसे हम इंदरधनुष कहते हैं | इंदरधनुष सदैव सूर्य के विपरीत दिशा में बनता है | 

प्रकाश के अवयवी वर्णों के इस बैंड को वर्णक्रम कहते हैं | ये सात रंग हैं –  बैंगनी , जामुनी , नीला , हरा , पीला , नारंगी और लाल |

वायुमंडलीय अपवर्तन  -: 

  • तारों का टिमटिमाना
  • अग्रिम सूर्योदय तथा विलंबित सूर्यास्त

तारे  क्यों टिमटिमाते हैं ?

पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने के पश्चात् पृथ्वी के पृष्ठ पर पहुँचने तक तारे का प्रकाश निरंतर अपवर्तित होता रहता है | वायुमंडलीय अपवर्तन उसी माध्यम में होता है जिसका क्रमिक परिवर्ती अपवर्तनांक हो , क्योंकि वायुमंडल टारे के प्रकाश कप अभिलम्ब की ओर झुका देता है , अतः तारे की आभासी स्थिति उसकी वास्तविक स्थिति से कुछ ऊंचाई पर दिखाई देती है | वायुमंडल की भौतिक अवस्थाएं बदलने के कारन तारे की आभासी स्थिति भी बदलती रहती है तथा आँखों में प्रवेश करने वाले तारों के प्रकाश की मात्रा झिलमिलाती रहती है जिसके कारण तारे टिमटिमाते दिखाई देते हैं | 

 ग्रह क्यों नहीं टिमटिमाते ?

तारों की अपेक्षा , ग्रह पृथ्वी के काफी पास होते हैं इसलिए इसे प्रकाश का एक बड़ा स्त्रोत माना जाता है | यदि ग्रह को बिंदु  साइज के अनेक प्रकाश स्त्रोतों का संग्रह मान लें तो सभी बिंदु साइज के प्रकाश स्त्रोतों से हमारे  नेत्रों में प्रवेश करने वाले प्रकाश की मात्रा में कूल परिवर्तन का औसत मान शून्य होगा , इसी कारण ग्रह नहीं टिमटिमाते |

अग्रिम सूर्योदय तथा विलंबित सूर्यास्त :-

वायुमंडलीय अपवर्तन के कारण सूर्य हमें वास्तविक सूर्योदय से लगभग 2 मिनट पहले दिखाई देने लगता है और वास्तविक सूर्यास्त के  लगभग 2 बाद तक दिखाई देता है  |

प्रकाश का प्रकीर्णन :-

वायुमंडल में उपस्थित धूल तथा अन्य सूक्ष्म कणों के द्वारा प्रकाश की किरणों का फैलाना प्रकाश का प्रकीर्णन कहलाता है |

टिंडल प्रभाव:-

कोलाइड कणों से टकराकर प्रकाश की किरणें विसरित हो जाती है और परावर्तित होकर हमारे नेत्रों तक पहुंचती है तो हमें किरण पुंज का मार्ग दिखाई देने लगता  है , इसे ही टिंडल प्रभाव कहते हैं |

स्वच्छ आकाश का रंग नीला क्यों दिखाई देता है ?

लाल रंग की तरंग दैधर्य , नील रंग की तरंग दैधर्य से कम होती है | जब सूर्य का प्रकाश वायुमंडल से गुजरता है तो वायु के सूक्ष्म कण लाल रंग की अपेक्षा नीले  रंग (कम तरंग दैधर्य) को अधिक प्रकीर्णित करते हैं | प्रकीर्णित हुआ नीला प्रकाश हमारे नेत्रों तक पहुंचता है और हमें आकाश नीला दिखाई देता है |

अंतरिक्ष यात्री को आकाश काला  क्यों दिखाई देता है ?

अत्यधिक ऊंचाई पर उड़ते हुए अंतरिक्ष यात्रियों को आकाश काला  दिखाई देता है क्योंकि इतनी ऊंचाई पर प्रकाश का परिकीर्ण  नहीं हो पाता |

सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य हमें लाल या रक्ताभ क्यों दिखाई देता है

क्षितिज के समीप स्थित सूर्य से आने वाला प्रकाश हमारे नेत्रों तक पहुंचने से पहले पृथ्वी के वायुमंडल में वायु की मोटी  परत से होकर गुजरता है | जब सूर्य सिर  के ठीक ऊपर हो तो सूर्य से आने वाला प्रकाश , अपेक्षकृत कम दुरी चलेगा | दोपहर के समय सूर्य श्वेत प्रतीत होता है क्योंकि नीला तथा  बैंगनी रंग बहुत कम  प्रकीर्णित हो पाता  है | क्षितिज के समीप नीले तथा कम तरंग दैध्र्य  प्रकाश ज्यादा प्रकीर्णित हो जाता है , इसलिए हमारे नेत्रों तक पहुंचने वाला प्रकाश अधिक तरंग दैध्र्य का होता है | इससे सूर्योदय और सूर्यास्त के समय सूर्य हमें लाल या रक्ताभ  दिखाई देता है |

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