विद्युत धारा के चुंबकीय प्रभाव

चुम्बक के निकट लाने पर दिक्सूचक की सुई विक्षेपित क्यों हो जाती है ?

दिक्सूचक की सुई एक छोटा छड़ चुम्बक ही होती है , जिसके दोनों सिरे लगभग उत्तर और दक्षिण दिशाओं की ओर संकेत करती है | उत्तर दिशा की ओर संकेत करने वाला सिरा उत्तर ध्रुव और दक्षिण दिशा की ओर संकेत करने वाला सिरा दक्षिण ध्रुव कहलाता है | चुंबकों के सजातीय ध्रुवों में परस्पर प्रतिकर्षण तथा विजातीय ध्रुवों में परस्पर आकर्षण होता है |

किसी छड़ चुंबक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं खींचिए |

  • चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं के गुणों की सूचि बनाइए |

1.          चुंबक के बाहर, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं उत्तर ध्रुव से निकलकर दक्षिण ध्रुव की ओर जाती हैं

2.         चुंबक के अंदर , चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं दक्षिण ध्रुव से उत्तर ध्रुव की ओर जाती जाती हैं |

3.         चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक बंद वक्र बनाती  हैं |

4.         चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं एक – दूसरे को कभी नहीं काटती

5.         चुंबकिय क्षेत्र  की शक्ति चुंबकिये रेखाओं की दुरी पर निर्भर करती है

दक्षिण -हस्त अंगुष्ठ नियम क्या है ?

हम अपने दाहिने हाथ में विद्युत् धारावाही चालक को इस प्रकार पकड़े  हुये हैं की हमारी अँगुलियाँ चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा में लिपटी होंगी | इसे दक्षिण -हस्त (दायाँ हाथ ) अंगुष्ठ नियम कहते  हैं | 

विद्युत धारावाही वृताकार पाश के कारण चुंबकीय क्षेत्र

किसी विद्युत् धारावाही चालक के कारण उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र  के व्युत्क्रम पर निर्भर करता है | इसी प्रकार किसी विद्युत धारावाही पाश के प्रत्येक बिंदु पर उसके चारों ओर उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र को निरूपित करने वाले संकेद्री वृतों का साइज तार से दूर जाने पर निरंतर बड़ा  होता जाता है जैसे ही वृताकार पाश के केंद्र पर पहुंचते हैं , इन वृहत वृतों के चाप सरल रेखाओं  होने लगते हैं विद्युत धारावाही तार के प्रतीक बिंदु से उत्पन्न चुंबकीय क्षेत्र रेखाएं पाश के केंद्र पर सरल रेखा जैसी प्रतीत होने लगती है |

चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दिशा और चुंबकीय बल का पता दक्षिण हस्त अंगुष्ठ नियम से लगा सकते हैं | 

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