संक्षारण :-

धातुएँ  अपने आस-पास अम्ल , आर्द्रता और वायु के संपर्क में आने से संक्षारित हो जाती हैं , इस प्रक्रिया को संक्षारण कहते हैं |

•सिल्वर , वायु में उपस्थित सल्फर के साथ अभिक्रिया करके सिल्वर सल्फाइड़ की परत बनने के कारण सिल्वर काली पड़ जाती है |

•कॉपर  , वायु में उपस्थित CO2  के साथ अभिक्रिया करके कॉपर कार्बोनेट की परत बनने के कारण कॉपर हरी हो जाती है |

लोहा  , आर्द्र  वायु के साथ अभिक्रिया करके आयरन ऑक्साइड की परत बनने के कारण इसका रंग भूरा पड़ जाता है , इसे जंग कहते हैं |

संक्षारण से सुरक्षा :- 

 पेंट करके , तेल लगाकर , ग्रीज लगाकर , यशदलेपन , एनोडीकरण या मिश्रधातु बनाकर लोहे को जंग  से बचाया  जा सकता है |

 लोहे को जंग से बचाने के लिए इसपर जिंक (जस्ते ) की परत चढाने की विधि को यश्द्लेपन कहते हैं |

 दो या दो से अधिक धातुयों के समांगी मिश्रण को मिश्रातु  कहते हैं  | शुद्ध धातु की अपेक्षा उसके मिश्रातु की विधयुत चालकता तथा गलनांक कम होता है  | उदाहरण –

• तांबा  (कॉपर )  +  जस्ता (जिंक )     =      पीतल

• तांबा (कॉपर )   +   टिन         =        काँसा

•सीसा (लैड )  +    टिन            =          सोल्डर

यदि कोई एक धातु पारा है तो इसके मिश्रातु को अमलगम कहते हैं |

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