साबुन और अपमार्जक  

साबुन और अपमार्जक हर घर में उपयोग होने वाला सामान है , इसलिए हमे इसके बारे में थोड़ा – बहुत जानना बहुत आवश्यक हो जाता है , तो आज के इस टॉपिक में हम साबुन और अपमार्जक में अंतर के साथ -साथ , साबुन की सफाई प्रक्रिया के बारे में भी बात करेंगे |

साबुन लंबी शृंखला वाले कार्बोक्षिलिक अम्लों के सोडियम या पोटैशियम लवण होते हैं |

साबुन मृदु जल में सफाई करती है |

साबुन का सूत्र :-  C17H35COO- Na+

अपमार्जक लंबी शृंखला वाले कार्बोक्षिलिक अम्लों के अमोनियम या सल्फेट  लवण होते हैं |

अपमार्जक कठोर और मृदु दोनों जल में सफाई कर सकते हैं |

साबुन के अणु की सरंचना:-

साबुन के अणु के दो भाग होते हैं – (1) आयनिक भाग

                             (2) हाइड्रोकार्बन शृंखला भाग

आयनिक भाग जलरागी (जल में घुलनशील) होता है और हाइड्रोकार्बन शृंखला भाग

 जलविरागी (जल में अघुलनशील) होता है |

साबुन की सफाई प्रक्रिया

                   जब साबुन जल की सतह के ऊपर होता है

तब आयनिक सिरा जल के अंदर होता है लेकिन

 जल के अंदर साबुन के अणुओं एक गुच्छा बना

 लेते हैं जिसमें हाइड्रो कार्बन सिरा गुच्छे के

आंतरिक हिस्से में होती है व आयनिक सिरा

गुच्छे की सतह पर होता है, इस सरंचना को

 मिसेल कहते हैं |    

मैल , मिसेल के केंद्र में इकट्ठे हो जाते हैं | मिसेल विलयन में कोलाईड के रूप में बने रहते हैं और मैल को साफ कर देते हैं |

साबुन कठोर जल में उपस्थित मैगनेसियम और कैल्सियम के लवण के साथ अभिक्रिया करके अघुलनशील पदार्थ (स्कम )बना लेते हैं, इसलिए साबुन कठोर जल में सफाई नहीं करता |

एथेनोइक अम्ल के भौतिक गुणधर्म

•इसे ऐसेटिक अम्ल कहा जाता है

•इसका गलनांक 290 K होता है, ठंडे मौसम में यह जम जाता है इसलिए इसे ग्लैशैल  ऐसेटिक अम्ल कहा जाता है |

•इसका कव्न्थ्नांक 391 K होता है

•ऐसेटिक अम्ल के 3-4% विलयन को सिरका  कहा जाता है, इसे आचार में परिरक्षक के रूप में इस्तेमाल किया जाता है |

•यह रंगहीन होता है |

एस्टेरीकरण अभिक्रिया :-

अम्ल और एल्कोहोल की अभिक्रिया होने  से                                      

          ये एस्टर का निर्माण करते हैं इस अभिक्रिया को  एस्टेरीकरण अभिक्रिया कहते हैं |

                                                             अम्ल  

  1.    CH3COOH  +  CH3CH2OH          ———>                        CH3COOCH2CH3  +   H2O

एस्टर का उपयोग इत्र बनाने में किया जाता है

                                                          NaOH

       2)      CH3COOCH2CH3                ----->                                     CH3CH2OH  +  CH3COONa

इस विधि से साबुन बनाई जाती है , इसलिए इसे साबुनीकरण कहते हैं |

क्षारक के साथ अभिक्रिया :-

 CH3COOH  +  NaOH    ———–>                     CH3COONa   +    H2O

कार्बोनेट और हाइड्रोजन कार्बोनेट के साथ अभिक्रिया :-

CH3COOH +  Na2CO3            ————–>      2CH3COONa  +    H2O  +  CO2

CH3COOH   +  NaHCO3     ————->             CH3COONa  +  H2O  +  CO2 

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